Friday, July 11, 2008

भारत के युवा. . .

अक्सर ये चर्चा सुनाई देती है की भारत शीघ्र ही दुनिया के प्रमुख शक्तिशाली एवं विकसित देशो की श्रेणी में पहुँच जाएगा। इसके जो विभिन्न कारण गिने जाते है, उनमे एक मुख्या कारण यह है कि भारत कि लगभग ५०% जनसंख्या युवा है और यही युवा पीढ़ी भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेगी।
समय के साथ-साथ जैसे सभी क्षेत्रो में परिवर्तन हुए है, उसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी कई बदलाव हुए है। पारंपरिक विषयो के अलावा अनेक नए पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं और आज भारतीय युवाओं के पास शिक्षा के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। इसका लाभ ये हुआ है कि हमारे देश के युवाओं ने अपनी रुचियों और क्षमताओं के अनुसार विषय का चुनाव किया और प्रत्येक क्षेत्र में भारत के युवा छा गए। चाहे चिकित्सा का क्षेत्र हो या साहित्य का, शिक्षा का क्षेत्र हो या व्यापार का, Computers का क्षेत्र हो या अंतरिक्ष अनुसंधान का; हर जगह, हर क्षेत्र में, हर देश में, भारतीय युवाओं ने अपनी छाप छोड़ी है। भारत के युवा जिस देश में गए, वहाँ उन्होंने उस देश कि उन्नति के लिए अपनी पूरी क्षमता का उपयोग मेहनत, इमानदारी और निष्ठा के से किया.इससे दुनिया में भारत का सम्मान निश्चित ही बढ़ा है।
यह तो नि:संदेह गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि भारत के युवा जिस देश में भी गए हैं, वहा उन्होंने अपना परचम लहराया है। लेकिन, इससे जुड़े कुछ और पहलू भी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। भारतीय युवाओं ने विशव के सभी देशों में जाकर सफलता प्राप्त की है और उन देशों के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। लेकिन, आज भारत कि स्थिति क्या है? भूख, गरीबी, बेरोज़गारी, बीमारी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिगत द्वेष, अपराध आदि जैसी न जाने कितनी चुनौतियों से अपना देश जूझ रहा है। हर दिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। क्या इसे सुधारने के प्रति हमारा कोई कर्तव्य नहीं है?कभी जो आतंकवाद सिर्फ़ देश के सीमावर्ती राज्यों तक सीमित था,आज वह पूरे देश में फ़ैल चुका है। जम्मू-काश्मीर से तमिलनाडु तक और राजस्थान से मणिपुर तक हर राज्य से आतंकवादी घटनाओं कि खबरें मिलती रहती हैं। केरल से पश्चिम बंगाल तक सैकडो जिलों में नक्सली गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। पड़ोसी देशों से होने वाली घुसपैठ लगातार जारी है। दूसरी और हमारी सेना योग्य अफसरों की कमी से जूझ रही है। वायुसेना के अनेक Pilots ज्यादा वेतन और आरामदायक जीवन की चाह में निजी विमान कंपनियों का रूख कर रहे हैं। हमारे स्कूलों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों युवाओं के मन में USA,UK या ऑस्ट्रेलिया जाने का सपना पल रहा है, लेकिन ऐसे कितने हैं, जो भारतीय सैन्य दल में जाना चाहते हैं?ऐसे कितने हैं, जो विदेश में नौकरी के लुभावने प्रस्ताव को ठुकराकर अपना पूरा जीवन अपने देश की प्रगति के लिए समर्पित करना चाहते हैं?
हमें गर्व होता है की अमरीका में बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर कार्य करते हैं और उन्हें वहाँ बहुत सम्मान भी मिलता है। दूसरी और ये खबरें भी सुनाई देती हैं की आवश्यक स्वस्थ्य सुविधाओं और दवाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़ अनेक बच्चों और रोगियों की मृत्यु हो रही है। मेरे मन में प्रश्न उठता है की अमरीका में रह रहे जिन भारतीय डॉक्टर पर हमें गर्व होता है, यदि वे सुख सुविधाओं और धन की बजाय देश-सेवा को अधिक महत्व देते तो क्या हमें उन पर और अधिक गर्व नही हुआ होता? हम NASA में कार्य कर रहे भारतीयों की चर्चाएं भी अक्सर सुनते हैं। इसमें संदेह नही है की अंतरिक्ष अनुसंधान का महान कार्य सम्पूर्ण मानवता के लिए है। लेकिन, मानवता के हित का जो कार्य हमारे भारतीय युवा नासा में जाकर कर रहे हैं, वह भारत की अंतरिक्ष संस्था इसरो में भियो तो किया जा सकता था!! आज अनेक युवा वैज्ञानिकों का ध्येय नासा में कार्य करने का है, लेकिन हमारे देश का हर युवा डॉक्टर अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम जैसा क्यों नही है, जिन्होंने किसी विदेशी संस्था के लिए काम करने की बजाय देश में रहकर अनुसंधान करना ही ज्यादा पसंद किया? हम सभी आज नासा के Missions पर काम कर चुके भारतीय वैज्ञानिकों को जानते हैं, लेकिन हम में से कितने लोगों को भारत के एक मात्र अन्तरिक्ष यात्री श्री राकेश शर्मा का नाम भी याद है?
मैं विदेशों में जाकर शिक्षा प्राप्त करने, धन कमाने या अनुभव हासिल करने का विरोधी नहीं हूँ। अच्छे से अच्छा और आधुनिक ज्ञान प्राप्त करना, अधिक से अधिक धन-सम्पन्नता और सुख-सुविधा की इच्छा करना, ये सभी प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता भी है और अधिकार भी। इनकी प्राप्ति के लिए सभी तरह के उचित और नैतिक मार्गों से प्रयास भी करना चाहिय। लेकिन, अपनी आवश्यकताओं और अधिकारों की पूर्ति करते हुए हमें अपने देश की आवश्यकताओं और इसके प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए। हम यह याद रखें की केवल TAX के रूप में कुछ रुपये सरकार को दे देने से हमारा कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता। इस देश में जन्म लेकर, यहाँ के अन्न से पोषण पाकर, इस देश के संसाधनों का उपयोग करके, इस देश में शिक्षा प्राप्त करना और फ़िर इसे हमेशा के लिए छोड़कर विधेसों में बस जाना ठीक नही है। यदि कोई देश से बाहर जाना ही चाहता है, तो कुछ वर्षों तकवहाँ रहकर उसे लौट आना चाहिए और वहाँ से प्राप्त ज्ञान,धन और अनुभव का उपयोग भारत की प्रगति के लिए करना चाहिए। यहाँ मैं यह भी स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ की कुछ वर्षों में लौट आने का अर्थ यह नहीं है की हम पूरी क्रियाशील युवावस्था विदेशों में बिताएं और जीवन के अन्तिम वर्षों में अपने बुढापे का बोझ भारत पर डाल दें।
हम में से अधिकांश लोग देश की वर्तमान चिंताजनक स्थिति और भीषण समस्याओं के लिए सरकार को दोष देते हैं। यह सही है की स्वतन्त्रता के बाद भी हमारी सरकारों ने अंग्रेजों की बनाई हुई नीतियों को ही जारी रखा और उन्हें बढावा भी दिया। लेकिन, हमें यह नहीं भूलना चाहिए की ग़लत नीतियां बनने के लिए यदि सरकार दोषी है, तो ऐसी सरकारों को चुनने वाले मतदाता के रूप में हम भी दोषी हैं, और जो मतदान करते ही नहीं, वो तो और भी अधिक दोषी हैं क्योकि मतदान केवल हमारा लोकतान्त्रिक अधिकार ही नही, बल्कि हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। इसलिए हमें जागरूक रहकर देश-हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही पाने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
मैं इस बात से सहमत हूँ की भरात की युवा पीढी ही देश के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेगी। लेकिन, हमें यह याद रखना होगा की भरात का पुनर्निर्माण इस देश को छोड़कर चले जाने से नही होगा। वह तभी हो सकता है,जब हम देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे और इसकी प्रगति में अपना पूरा योगदान करें।
मुझे इस बात का पूरा अहसास है की देश-सेवा और कर्तव्य आदि बातो को पढ़कर कुछ लोग शायद मेरा उपहास भी करेंगे, लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ की मैंने ऐसे लोगो के लिए ये सब लिखने का कष्ट नहीं किया है। मैंने तो उन लोगों के लिए ये सब लिखा है, जिनके मन में आज भी अपना महान भारत समाया हुआ है। ऐसे सभी युवाओं से मेरी यही अपील है की किसी भी प्रकार के भ्रम में न पड़ते हुए केवल अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और अपने देश की प्रगति में पूरा योगदान करें।
आप सबकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इंतज़ार रहेगा। सृजनात्मक (Creative) सुझावों और सकारात्मक (Positive) आलोचनाओं का मैं हमेशा खुले दिल से स्वागत करूँगा। आपने मेरे विचारों को पढने के लिए अपना समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ।

7 comments:

  1. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

    वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

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  2. बढिया प्रयास है आपका, धन्यवाद । इस नये हिन्दी ब्लाग का स्वागत है ।
    शुरूआती दिनों में वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें इससे टिप्पयणियों की संख्या‍ प्रभावित होती है
    (लागईन - डेशबोर्ड - लेआउट - सेटिंग - कमेंट - Show word verification for comments? No)
    आरंभ ‘अंतरजाल में छत्तीसगढ का स्पंदन’

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  3. you are right. Welcome to hindi blogging.

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  4. आपने बढिया लेख लिखा है ! और आपका सोच काफी ह्द तक सही है ! शुभकामनाए !

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. ur blog is good.i appriciate that.but there are some printing mistakes at the end of 3rd and in the begining of 4th para...plz correct them.
    1 more thing i want to tell u is that BHARAT KE YUWAO KO DESH KE BAHAR JAKAR WAHA KAM KARNE AUR WAHA PAR ACCHA NAM KARNE SE YE KABHI BHI SABIT NAHI HOTA KI UNHE IS DESH KE PRATI KUCH SHRADHA HAI.YE TO US DESH KE LOGO KO HI LAGTA HAI KI YE ..DR. YA ... ENGG. BHARAT KO BELONG KARTA HAI PAR KYA US DR. KE MAN ME YE BAT HAI.AUR MERE ANUSAR SE KOI MAPDAND KAM SE KAM APNE DESH KI PRAGATI KA TO NAHI HAI KI AGAR KOI DR. VIDESH ME SAFAL HAI TO YE MANA JAYE KE BHARAT KA UDAY HO RAHA HAI.BHARAT JAG RAHA HAI.
    PLZ THINK ON IT.
    NICE BLOG.
    I REALLY LIKE IT.
    WELL DONE.
    AISE HI NIRANTAR PRAYATNA KARTE RAHE MERE SHUBHKAMNAYE AAPKE SATH HAI.

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  7. Hi,
    Thanks for dropping by my blog and writing such encouraging comment. I am honoured.
    I see your blog is new. The message you pass thru this post is good but there is another side to this coin also. Think about it.

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. प्रयास भी अच्छा है | अभी शुरुआत है, लिखते रहिये और हम सब हैं ना आपके साथ, आप अकेला नहीं महसूस करेंगे | :-)

    All the best !
    Cuckoo

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