Friday, May 7, 2010

तस्वीरों के पार

मैं अपनी तस्वीरों में हूँ भी और नहीं भी
मैं अपने पोस्टर में हूँ भी और नहीं भी
इसमें न कोई विरोध
न कोई विरोधाभास.

तस्वीर आत्मा जैसी नहीं है
वह तो पानी में भीगती है
आग में जलती है
बह भीगे या जले
मुझे कुछ नहीं होता

आप मुझे मेरी तस्वीर में या पोस्टर में
खोजने का मिथ्या प्रयत्न न करें.
मैं तो निश्चिंत बैठा हूँ
अपने आत्मविश्वास में-
अपनी वाणी, व्यवहार और कर्म में
आप मुझे मेरे कर्मों से जानें
कर्म ही मेरा जीवन-काव्य है
लयताल है.

घर में गीतासार
आंगन में कर्मधार
आप सभी के लिए अकारण आर्द्र
कोमल प्यार है

आप मुझे तस्वीर में नहीं
पसीने की खुशबू में खोजें
योजनाओं के अम्बार की थकावट में
मेरी आवाज़ की गूँज पहचानें
मेरी आँखों में आप ही की छवि है।

(श्री नरेंद्र मोदी की कविता का पाञ्चजन्य में प्रकाशित हिन्दी अनुवाद)

6 comments:

  1. सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  3. बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
    आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

    Sanjay kumar
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

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  5. उत्तम अभिव्यक्ति

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  6. धन्यवाद सुमंत भाई...यह पहलू मैं नहीं जानता था...

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