Sunday, November 7, 2010

मेरा भारत महान है?

छद्म-सेक्युलर भारत!

यहाँ गुजरात दंगों का ज़िक्र होता है, लेकिन गोधरा का नहीं,
कंधमाल की बात होती है, लेकिन स्वामी लक्ष्मणानंद जी की हत्या की नहीं,
काश्मीर में सेना पर पत्थर फेंकने वाले "मासूम" युवाओं की बात होती है,
लेकिन काश्मीरी पण्डितों की नहीं।

अफज़ल और कसाब जेल में शान से रहते हैं, साध्वी प्रज्ञा जैसे संत यातनाएँ सहते हैं,
नक्सली और आतंकी "भटके हुए नौजवान" कहलाते हैं, और बजरंग दल, शिवसेना के कार्यकर्ता आतंकवादी बताये जाते हैं,
अरुँधती और गिलानी राष्ट्रद्रोह करके भी मुक्त हैं,संघ के देशभक्त कार्यकर्ता आतंक के झूठे आरोपों से त्रस्त हैं।

शायद हिंदू विरोध ही इस देश की शान है, क्या इसीलिये मेरा भारत महान है?

11 comments:

  1. मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद... बहुत अच्छा लिखा आपने, ये हमारी युवा पीढ़ी का ही दायित्व है की इस देश को सशक्त व् विकसित देश बनाये.... आप के , मेरे और हम जैसे सभी भारतवासियों के प्रयास अवश्य ही सफल होंगे ......

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  2. सब वोटो का खेल है कोई भी उनके वोट को हासिल करना चाहता है
    मुलयम जैसे लोग तो उनके तलवे चाटने को तैयार है

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  3. धर्म मनुष्यों ने ही बनाये है मनुष्यों ने ही लिखे हैं। धर्म का मार्ग दिखाने वाले लिखने वालों का क्या हुआ क्या इनको स्वर्ग की प्राप्ती हुई उन्होने जो लिखा है उसने कितनी सच्चाई है या जो उसमे चमत्कार बताये हैं क्या ये संम्भव है आज भी होते है। या काल्पनिक कपोल कल्पना है ।

    मगर आंधों की तरह उसके मानने वाले अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने की होड़ में लगे है।अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने के लिये दूसरे धर्म की कमी
    निकालते है। ताकि अपने धर्म को श्रेष्ठ बता सकें।हर कोई अपने आपको बुद्धीजीवी ज्ञानवान समझाता है।हमारे बाप दादाओं से हम मानते आ रहे है अब हम मान रहे है सही है।
    प्रश्न हैरू. ये बताये आप खाना आंख बन्द करके खाते है
    या खाते समय आपकी नजर थाली पर रहती है कि कही
    कीड़ा या बाल तो नही है निवाले मे कंकंड़ आ जाता है
    तो आप उसे खा लेते है या उगल देते है। जरा सोचें।

    मेरा मानना है कि हम खाना देख कर खाते हैं कि कुछ
    गलत पेट मे न चला जाये । तो जब हम अपने शरीर के
    लिये ख्याल रखते हैं।
    तो धर्म के लिये आंख क्यो बन्द करे है।
    हमे खुद अपने धर्म के बारे मे पता नही है ईश्वर के बारे
    मे पता नही है। हमने खुद ईश्वर को पाया नही है और
    दूसरे को मनवा रहे है। हम हिन्दू और मुसलमान आपस
    मे एक दूसरे को नीचा दिखाने मे लगे है।

    मनुष्यों ही ने धर्म शास्त्रो को लिखा है हम कैसे मान लें
    की उन्होने जो लिखा है वो सही ही लिखा है अगर सही
    लिखा है तो हम उसे परखेंगें। सही पायेगे तो मानेगे भी।
    अरे हम 10रु का घड़ा या मटका खरीदते है तो 20 बार ठोक
    बजा कर दखते है अंन्दर झांक कर देखते हैं।

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  4. अत्यन्त बहुमूल्य कीमती अपने जीवन के लिये और मरने के बाद क्या होगा हम जिस रास्ते पर हम चल रहे है वो सही है कि नही हमने और आपने अपने धर्मो को झांक कर देखा है ठोक बजा कर देखा है
    अरे इतनी मेहनत और ताकत ईश्वर को ढूंढने मे लगा दो
    तो ईश्वर मिल जाये और हमारा आपका और सब का जीवन
    सफल हो जाये।
    राजनैतिक दल और सम्प्रदायिक संगठन राजनैतिक लाभ पाने के लिये धर्माे

    को आपस मे लड़ा रहे हैं।

    जनता के सामने सबसे धार्मिक प्रवत्ती के ये लोग जब पावर मे आते हैं तो सबसे भ्रष्ट हो जाते है कंहा रही धार्मिकता। और अपनी पीढ़ियो के लिये धन इकठ्ठा कर लेते है। नेता अपने बच्चो को कानवेंन्ट मे पढ़ाये।
    और हमे धर्म का पाठ पढ़ाते है हमे कहते है कि सरस्वती स्कूल मे बच्चो को पढ़ाओ संस्कृत पढ़ाओ ताकि हमारे बच्चे अंग्रेजी न पढ़ पायें क्योकि दुनिया का ज्ञान लिटरेचर और कम्प्यूटर सब अंग्रेजी मे है।

    अगर हमारे बच्चे ज्ञानी हो गये तो इनकी धकियानूसी कहां चलेगी

    आपको मालूम होगा कि चीन अंग्रेजी को कितना महत्व दे रहा है इंग्लिश टीचरो को बुला कर सारी सुविधायें और तगड़ी पेमेन्ट दे रहा है। उसको मालूम है कि अंग्रेजी कितनी महत्व पूर्ण है।

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  5. आपने सही कहा सुमंत जी हिन्दी हमारी मातृ भाषा है। और पूरे भारत

    मे हिन्दी अनिवार्य होना चाहिये। मै हिन्दी का विरोधी नही हूं मेरी

    भाषा हिन्दी ही है। भारत मे धर्म के ठेकेदार अपने अपने राज्यो मे

    अपनी राग अलाप रहे हैं। महाराष्ट्र् का उधाहरण सामने है साउथ मे

    भी समस्या है। मगर इसका कोई उपाय नही है क्योकि हिन्दू वादी

    संगठन ही हिन्दी को दबा रहे है।

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  6. आपने सही कहा सुमंत जी हिन्दी हमारी मातृ भाषा है। और पूरे
    भारत मे हिन्दी अनिवार्य होना चाहिये। मै हिन्दी का विरोधी नही हूं मेरी भाषा हिन्दी ही है। भारत मे धर्म के ठेकेदार अपने अपने राज्यो मे अपनी राग अलाप रहे हैं। महाराष्ट्र् का उधाहरण सामने है साउथ मे
    भी समस्या है। मगर इसका कोई उपाय नही है क्योकि हिन्दू वादी

    संगठन ही हिन्दी को दबा रहे है।

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  7. रही बात आपके विचारों की तो मै उससे सहमत नही हूं।

    या तो आप अन्जान है या तो आप.................................

    जिनको आप बेचारे बोल रहे है ये आने वाले समय मे भारत को

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान बनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।


    मै भी हिन्दू हूं मगर मै दूरदर्शी परिणाम जान रहा हूं।

    ये कुण्ठा ग्रस्त लोग अपनी कुत्सित मानसिकता और छड़िंक राजनैतिक लाभ के लिये भारत के नौजवानो की ताकत का गलत उपयोग कर रहे है। और नौजवानो के अन्दर जहर घोल रहे है।
    पड़ोसी देश की राह पर चला रहे है। अरे भईया ये जो जीवन है बहुत अनमोल है। पड़ोसियो को तो 72-73 का सुख और नदियां मिलेगी।
    अपना क्या होगा गनीमत है कि अपने मे ऐसा कुछ नही हैं नही तो पड़ोसी से सौ गुना आगे होते हम

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  8. धर्म स्थलों में तोड़फोड़ संतों का अपमान करना भारत की संस्कृति नही

    उड़ीसा,मध्य प्रदेश,कर्नाटक एंव देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचार हमले और चर्चों को जलाये जाने की घटना दुखद है।

    देश मे चन्द लोग धर्म के ठेकेदार राजनैतिक लाभ के लिये लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर हमारे देश की भोली-भाली जनता,नौजवान,युवा वर्ग को मानवता,भाईचारा, आपसी सद्भाव, देश प्रेम की शिक्षा, अच्छे आदर्श की मजबूत नीव डालने के बजाये। हमारे देश की नीव, हमारे देश के मजबूत खम्बे,हमारे देश का गौरव, भारत देश का भविष्य हमारे नौजवान,युवा वर्ग के हाथों से जघन्य अपराध करवा कर पाप के भागी बना कर भारत देश की नीव को कमजोर खोखला कर रहे हैं।और देश में फूट डालने का काम कर रहे है।

    कहावत है:-जिस घर देश मे फूट पड़ जाती है वो घर बर्बाद हो जाता है। हम सब जानते है बुजुर्गों ने भी कहा है जैसा हम बीज बोते है वैसा हम काटते हैं तात्पर्य जैसी करनी वैसी भरनी। हर बुरे और अच्छे कार्य का प्रतिफल इसी मनुष्य योनी मे मिलता है। और पीढियों तक भुगतना पड़ता है।हमारी आने वाली पीढी ये न कहे कि हमारे बाप दादों ने अंगूर खाये थे दांत हमारे खट्टे हुऐ। हम सब देखते और जानते हैं इतिहास भी गवाह है।


    ईसाई समाज यीशु मसीह की आज्ञा जैसे कि:- अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना आदर करना, हत्या न करना, चोरी न करना, किसी के विरुद्ध झूठी गवाही न देना किसी भी प्रकार का लोभलालच न करना,झूठ न बोलना,व्यभिचार न करना,मनुष्य से अपने समान प्रेम रखना,झगड़ा न करना ईर्ष्या न करना आदि हैं।
    भूखे को रोटी भोजन देना, नन्गे को कपड़ा पहनाना, गरीबों लाचारों की मदद करना, बीमारों की सेवा और उनके लिये प्रार्थना करना,बन्दीग्रह मे कैदियों की सुधी लेना, अनाथों और विधवाओं पर अन्याय नही करना इनकी मदद करना, मनुष्य का हृदय ईश्वर का मंदिर है ईश्वर मनुष्य के हृदय मे वास करता है यही मानव सेवा है जिसे हम मानवता या मानव धर्म कहते हैं।

    ईश्वर की सेवा है। जो कंगालों पर अनुग्रह करता है वो ईश्वर परमात्मा को उधार कर्ज देता है। ईश्वर के इन्ही आदर्शों का पालन करते हुऐ भारत देश के मूल निवासी मसीही समाज अपने जीवन का निर्वाहन कर रहा है।

    मै आपसे यह पूछना चाहता हंू कि क्या ये गलत काम है अगर ये गलत काम है तो फिर अच्छे काम क्या हैं। जो चन्द लोग अपने राजनैतिक लाभ के लिये करवा रहे हैं:- गुरुओं को अपमानित करना उनकी हत्या करना,भोले भाले लोगों की हत्या, लोगों के घरो मे आग लगाना और बेघर करना, धार्मिक स्थानो को आग लगा कर उजाड़ना, साघू संतों पर अण्डे फेकना, समाज को अच्छी शिक्षा देने वाले पूज्यनीय धर्म गुरुओं, ईश्वर के दूतों को जूते चप्पल से मारना लात घूसों से मारते हुऐ अपमानित करना,क्या ये ही इन लोगों का धर्म एंव धर्म की परिभषा है क्या ये ही हमारे भारत देश की संस्कृति और सभ्यता है

    समाज के सभी वर्गों के लोंगों और देश का भविष्य नौजवान युवा वर्ग से यह आग्रह है कि ये चन्द लोग मानवता, भाईचारा, आपसी सद्भाव को छोड़ कर अपने घृणित मंसूबे पूरे करवाते आ रहे हैं। और देश के लोंगों को युवा वर्ग को पाप के गर्त में ढकेलने वाले धर्म की गलत शिक्षा देने वाले ऐसे लोगों से हमें एंव भारत देश के प्रत्येक व्यक्ति को सावधान रहने की जरुरत है। भारत देश में मानवता,आपसी सद्भाव भाई-चारा एंव एकता बनाये रखने मे अपना अमिट सहयोग प्रदान करना प्रत्येक भारतीय व्यक्ति का कर्तव्य है।

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  9. धर्म स्थलों में तोड़फोड़ संतों का अपमान करना भारत की संस्कृति नही

    उड़ीसा,मध्य प्रदेश,कर्नाटक एंव देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचार हमले और चर्चों को जलाये जाने की घटना दुखद है।

    देश मे चन्द लोग धर्म के ठेकेदार राजनैतिक लाभ के लिये लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर हमारे देश की भोली-भाली जनता,नौजवान,युवा वर्ग को मानवता,भाईचारा, आपसी सद्भाव, देश प्रेम की शिक्षा, अच्छे आदर्श की मजबूत नीव डालने के बजाये। हमारे देश की नीव, हमारे देश के मजबूत खम्बे,हमारे देश का गौरव, भारत देश का भविष्य हमारे नौजवान,युवा वर्ग के हाथों से जघन्य अपराध करवा कर पाप के भागी बना कर भारत देश की नीव को कमजोर खोखला कर रहे हैं।और देश में फूट डालने का काम कर रहे है।

    कहावत है:-जिस घर देश मे फूट पड़ जाती है वो घर बर्बाद हो जाता है। हम सब जानते है बुजुर्गों ने भी कहा है जैसा हम बीज बोते है वैसा हम काटते हैं तात्पर्य जैसी करनी वैसी भरनी। हर बुरे और अच्छे कार्य का प्रतिफल इसी मनुष्य योनी मे मिलता है। और पीढियों तक भुगतना पड़ता है।हमारी आने वाली पीढी ये न कहे कि हमारे बाप दादों ने अंगूर खाये थे दांत हमारे खट्टे हुऐ। हम सब देखते और जानते हैं इतिहास भी गवाह है।


    ईसाई समाज यीशु मसीह की आज्ञा जैसे कि:- अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करना आदर करना, हत्या न करना, चोरी न करना, किसी के विरुद्ध झूठी गवाही न देना किसी भी प्रकार का लोभलालच न करना,झूठ न बोलना,व्यभिचार न करना,मनुष्य से अपने समान प्रेम रखना,झगड़ा न करना ईर्ष्या न करना आदि हैं।
    भूखे को रोटी भोजन देना, नन्गे को कपड़ा पहनाना, गरीबों लाचारों की मदद करना, बीमारों की सेवा और उनके लिये प्रार्थना करना,बन्दीग्रह मे कैदियों की सुधी लेना, अनाथों और विधवाओं पर अन्याय नही करना इनकी मदद करना, मनुष्य का हृदय ईश्वर का मंदिर है ईश्वर मनुष्य के हृदय मे वास करता है यही मानव सेवा है जिसे हम मानवता या मानव धर्म कहते हैं।

    ईश्वर की सेवा है। जो कंगालों पर अनुग्रह करता है वो ईश्वर परमात्मा को उधार कर्ज देता है। ईश्वर के इन्ही आदर्शों का पालन करते हुऐ भारत देश के मूल निवासी मसीही समाज अपने जीवन का निर्वाहन कर रहा है।

    मै आपसे यह पूछना चाहता हंू कि क्या ये गलत काम है अगर ये गलत काम है तो फिर अच्छे काम क्या हैं। जो चन्द लोग अपने राजनैतिक लाभ के लिये करवा रहे हैं:- गुरुओं को अपमानित करना उनकी हत्या करना,भोले भाले लोगों की हत्या, लोगों के घरो मे आग लगाना और बेघर करना, धार्मिक स्थानो को आग लगा कर उजाड़ना, साघू संतों पर अण्डे फेकना, समाज को अच्छी शिक्षा देने वाले पूज्यनीय धर्म गुरुओं, ईश्वर के दूतों को जूते चप्पल से मारना लात घूसों से मारते हुऐ अपमानित करना,क्या ये ही इन लोगों का धर्म एंव धर्म की परिभषा है क्या ये ही हमारे भारत देश की संस्कृति और सभ्यता है

    समाज के सभी वर्गों के लोंगों और देश का भविष्य नौजवान युवा वर्ग से यह आग्रह है कि ये चन्द लोग मानवता, भाईचारा, आपसी सद्भाव को छोड़ कर अपने घृणित मंसूबे पूरे करवाते आ रहे हैं। और देश के लोंगों को युवा वर्ग को पाप के गर्त में ढकेलने वाले धर्म की गलत शिक्षा देने वाले ऐसे लोगों से हमें एंव भारत देश के प्रत्येक व्यक्ति को सावधान रहने की जरुरत है। भारत देश में मानवता,आपसी सद्भाव भाई-चारा एंव एकता बनाये रखने मे अपना अमिट सहयोग प्रदान करना प्रत्येक भारतीय व्यक्ति का कर्तव्य है।

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  10. 100 मे 99 बेइमान फिर भी मेरा भारत महान

    कांग्रेस भाजपा और सभी पार्टियां बेइमान

    केन्द्र में कांग्रेस के नेता घूस खा रहे है।

    राज्यो मे भाजपा और उसके सहयोगी संगठन घूस खा रहे है।

    और जनता को धर्म की राह बता रहे हैं।

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  11. जिस बात को आप, हम और आम लोग भली भांति समझ रहे हैं, उसे देश के कर्णधार समझना नहीं चाहते, पापी पेट का जो सवाल है...

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