Tuesday, November 13, 2012

कुछ मीठा हो जाए!

(http://www.stow.ac.uk/media/diwali.gif)
बधाई! दीपावली आ गई है, मेरे सारे शुभचिंतक न्यूज़ चैनल ये बताने में भिड़े हुए हैं कि दूध, खोवा, मिठाइयां सब मिलावटी हैं, सेहत के लिए हानिकारक हैं. ये मिलावट शायद सिर्फ़ इन्हीं दिनों में होती है, इसीलिए तो ये "ईमानदार और विश्वसनीय" चैनल ऐसी खबरें सिर्फ़ दीवाली से पहले ही दिखाते हैं.

जब ये चैनल बार-बार "कुछ मीठा हो जाए" बताते हैं, लेकिन कभी ये नहीं दिखाते कि वह "मीठी" चॉकलेट किन स्वास्थ्यवर्धक और शुद्ध पदार्थों से बनती है, तो मुझे मीठे ज़हर की याद आती है.

इन्होने मुझे ठंडा मतलब कोका-कोला तो सिखाया है, लेकिन कोक या पेप्सी में मुझे "ठंडा" करने के लिए क्या-क्या मिलाया हुआ है, ये कब बताएंगे?

मैंने तो ये भी सुना है कि सारा प्रदूषण दीपावली के पटाखों से ही होता है. शायद 31 दिसंबर की रात को दुनिया भर में होने वाली आतिशबाज़ी, बिना शोर और प्रदूषण वाली होती है, शायद रोज़ सडक पर रेंगने वाली लाखों गाड़ियाँ बिना धुंए के चलती हैं, शायद उनके हौर्न भी साइलेंट होते हैं, शायद रोज़ नदियों में छोड़ा जाने वाला गन्दा पानी प्रदूषण नहीं फैलाता.

जल की बर्बादी भी सिर्फ़ होली में ही होती है. रेन-डांस वाली पार्टियों में तो शायद सूखा-पानी उड़ाया जाता है.

चलिए ये सब छोड़िये, आइये कुछ मीठा हो जाए! "तो इस दीवाली पर आप किसे खुश करेंगे??"
शुभ दीपावली!

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