Tuesday, December 25, 2012

आईटी एक्ट 2008 में किए गए नए संशोधन

कुछ माह पूर्व आउटलुक पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 11 अप्रैल 2011 को भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधित) कानून-2008 के अनुच्छेद 79 में कुछ कठोर नियम जोड़ दिए हैं, जिसके बाद सरकार इंटरनेट पर किसी भी ब्लॉग, वेबसाइट, फेसबुक व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों व किसी भी व्यक्ति के ई-मेल व चैट संवादों की निगरानी कर सकती है व आपत्तिजनक प्रतीत होने पर किसी भी ब्लॉग या साइट को ब्लॉक कर सकती है। इस संशोधन की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

1. नियम 43 ए व नियम 79 के अनुसार सरकार किसी भी इंटरमीडियरी (इंटरनेट सेवाएं देने वाली कोई कंपनी, जैसे गूगल) से किसी भी व्यक्ति का इलेक्ट्रॉनिक डेटा हासिल कर सकती है। इसके लिए सरकार को किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

2. आईटी ऐक्ट के अनुच्छेद 2(डब्ल्यू) के अनुसार इंटरमीडियरी का अर्थ है, कोई भी ऐसा व्यक्ति/कंपनी जो किसी अन्य के लिए किसी तरह का कोई रिकॉर्ड एकत्र करता है, भेजता है या उस इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित कोई भी सेवा देता है। इनमें इंटरनेट व वेब-होस्टिंग सेवा प्रदाता, सर्च इंजन, ऑनलाइन ऑक्शन साइट्स, ऑनलाइन पेमेंट साइट्स, ऑनलाइन मार्केटप्लेस व साइबर कैफे शामिल हैं।

3. इस संशोधन के बाद अब सरकार इंटरनेट पर होने वाली आपकी बातें सुन सकती है, ईमेल पढ़ सकती है, चैट रिकॉर्ड देख सकती है और इनमें से किसी को भी आधार बनाकर आपके विरूद्ध कार्यवाही कर सकती है।

4. ये नियम इंटरनेट पर समस्त वेबसाइट होस्ट, ब्लॉग, सर्च-इंजन, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, मीडिया साइट्स आदि सभी पर लागू होंगे और सरकार केवल एक पत्र भेजकर इंटरमीडियरी से कोई भी जानकारी हासिल कर सकती है।

5. यदि इंटरनेट पर लिखे गए किसी भी लेख, टिप्पणी या समाचार पर सरकार को आपत्ति हो, तो इंटरमीडियरी को 36 घंटों के भीतर उसे हटाना होगा। ऐसा न किए जाने पर सरकार कोई भी नोटिस दिए बिना उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप 3 साल से लेकर उम्रकैद, 1 लाख से 10 लाख तक जुर्माना और आईटी एक्ट-2008 के अनुसार 5 करोड़ तक हर्जाना भरना पड़ सकता है।

देश के अनेक साइबर विशेषज्ञों की राय है कि ये संशोधन देश के नागरिकों को प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त करते हैं। विडंबना ये है कि भारत में इंटरनेट का नियमित प्रयोग करने वाले लगभग 10 करोड़ लोगों को अभी तक ये मालूम ही नहीं है कि इंटरनेट पर उनकी निजता और विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता पर कितने कठोर बंधन लादे जा चुके हैं और उन्हें फेसबुक या ट्विटर जैसी किसी साइट पर सरकार के खिलाफ कोई टिप्पणी करने के कितने घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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