Tuesday, May 28, 2013

वीर सावरकर – एक महान योद्धा

वीर सावरकर
  • संपूर्ण राजनैतिक स्वतंत्रता को निर्भयतापूर्वक भारत का लक्ष्य निर्धारित करने वाले पहले राजनेता (1900).
  • सार्वजनिक रूप से निर्भयतापूर्वक विदेशी वस्त्रों की होली जलाने वाले पहले भारतीय राजनेता (1905).
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए एक क्रांतिकारी आंदोलन का संचालन करने वाले पहले भारतीय व्यक्ति (1906).
  • पहले भारतीय विधि विद्यार्थी, जिन्हें परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने और सभी औपचारिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेने के बावजूद ब्रिटिशों से भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति की गतिविधियों में सहभागिता के कारण इंग्लिश बार (English Bar) द्वारा उपाधि प्रदान नहीं की गई (1909).
  • एकमात्र भारतीय नेता जिनकी लंदन में गिरफ़्तारी ने ब्रिटिश न्यायालयों के लिए कठिनाई उत्पन्न कर दी थी और जिनके मामले का उल्लेख आज भी फ़रार अपराधियों के अधिनियम और बंदी प्रत्यक्षीकरण की व्याख्या के लिए किया जाता है (रेक्स बनाम गवर्नर ऑफ़ ब्रिक्सटन प्रिज़न, एक्स-पार्टे सावरकर)
  • पहले भारतीय इतिहासकार जिनकी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी गई पुस्तक को इसके प्रकाशन सेपूर्व ही ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था. इस पुस्तक पर औपचारिक प्रतिबंध से छह माह पहले ही गवर्नर जनरल ने पोस्टमास्टर जनरल को पुस्तक की प्रतियां जब्त करने के आदेश दे दिए थे (1909).
  • पहले राजनैतिक कैदी जिनका पलायन और फ़्रांसीसी भूमि पर गिरफ़्तारी का मुद्दा हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाया गया. इस मामले का उल्लेख उस समय की अनेक अंतर्राष्ट्रीय संधियों में किया गया (1910).
  • पहले स्नातक जिनकी उपाधि भारत की स्वतंत्रता के प्रयासों में सहभागिता के कारण एक भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा वापस ले ली गई (1911).
  • विश्व के पहले कवि, जिन्होंने कागज़ और कलम के अभाव में, अपनी कविताओं की रचना की, उन्हें कीलों और नाखूनों से जेल की दीवारों पर लिखा, वर्षों तक प्रयास करके अपने काव्य की दस हज़ार पंक्तियां स्वयं कंठस्थ कर लीं और जिन साथी कैदियों ने भी उन्हें याद कर लिया था, उनके माध्यम से अपनी काव्य-रचनाएं भारत तक पहुंचाई.
  • पहले क्रांतिकारी नेता, जिन्होंने सुदूर रत्नागिरी जिले में नज़रबंदी के दौरान 10 वर्षों से भी कम समय में अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया.
  • पहले भारतीय नेता जिन्होंने सफलतापूर्वक शुरुआत की -
    • एक ऐसे गणेशोत्सव की, जो पूर्व-अस्पृश्य सहित सभी हिंदुओं के लिए था (1930).
    • पूर्व-अस्पृश्यों सहित सभी हिंदुओं के लिए अंतर्जातीय सहभोज की (1931).
    • "पतितपावन मंदिर" की, जिसमें पूर्व-अस्पृश्यों सहित सभी हिंदुओं को प्रवेश प्राप्त था (22 फरवरी 1931).
    • पूर्व-अस्पृश्यों सहित सभी हिंदुओं के लिए एक कैफ़े की (01 May 1933).
  • विश्व के पहले राजनैतिक कैदी जिन्हें दो जन्मों के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी, जो कि ब्रिटिश साम्राज्य के पूरे इतिहास में अद्वितीय मामला है. 
  • योग की उच्चतम परंपरा के अनुसार आत्म समर्पण  के द्वारा इच्छा-मृत्यु को स्वीकार करने वाले पहले राजनेता (1966).
    (स्रोत: www.savarkar.org)

6 comments:

  1. bahut acchi jankari thi .......sunder post

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  2. मेरा दावा है कि विदेशी इतिहासकारओं और फ्रांसीसी विचारकों के पिट्ठुओं के लिखे इतिहास में अपने महापुरुषों के बारे में जानकारियां नहीं मिलेंगी...महान वीर सावरकर की जयंती पर उनसे जुड़े कुछ विशेष तथ्य, जो मुझे बी पता नहीं थे। धन्यवाद सुमंत जी...

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    1. आशुतोष जी, मुझे लगता है कि इतिहास की भारतीय इतिहास की विकृति का जो कुचक्र अंग्रेज़ों ने प्रारंभ किया था, १९४७ के बाद भारतीय पाठ्यपुस्तकों के लेखन में मार्क्सवादी इतिहासकारों का वर्चस्व हो जाने के कारण यह कुचक्र जारी रहा और इसलिए १९४७ के बाद की पीढ़ियां भी भारत के वास्तविक इतिहास और अधिकांश महापुरुषों के कार्यों से अनभिज्ञ ही रह गईं. (ये केवल मेरा अनुमान है, जो गलत भी हो सकता है).

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  3. Excellent collection of information and brief presentation! best efforts!!
    Sudarshan Harshe

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