Friday, September 27, 2013

क्या नरेंद्र मोदी के कारण भारत संकट में है?

आज लोकमत समाचार में (पृष्ठ 4 पर) वरिष्ठ पत्रकार श्री कुलदीप नैय्यर का एक लेख पढ़ा। शीर्षक है – “संकट में है वह विचार जिसे हम भारत कहते हैं”, और इस संकट का कारण उन्होंने श्री नरेंद्र मोदी को बताया है। यह लेख पढ़कर कुछ प्रश्न मेरे मन में आ रहे हैं, जिनका उत्तर जानने के लिए ही मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ। यह किसी के समर्थन या विरोध में नहीं है, मैं केवल कुछ प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान पाने की आशा कर रहा हूँ।

उन्होंने लिखा है:
 मोदी को देश की अनेकता की परवाह नहीं है। उन्होंने हिंदू कार्ड इसीलिए खेला है क्योंकि उन्हें लगता है कि हिंदू बहुसंख्या वाले इस देश के साथ सेक्युलरिज्म मेल नहीं खाता है।

सबसे पहला प्रश्न मेरे मन में ये आया है कि मोदी ने कौन-सा
हिन्दू-कार्डखेला है? क्या मोदी ने ऐसा कोई वक्तव्य दिया है या कोई घोषणा की है जिससे लगे कि वे सिर्फ हिंदुओं के लिए काम कर रहे हैं? एक और प्रश्न मेरे मन में ये आया है कि इस बात का निर्णय कैसे होगा और कौन करेगा कि मोदी को देश की अनेकता की परवाह है या नहीं और सेक्युलरिज्म के बारे में मोदी के विचार क्या हैं? अगर लोकतंत्र में विश्वास है, तो क्या ये तय करने का अधिकार जनता का नहीं है? अगर है, तो गुजरात की जनता ने लगातार हर चुनाव में मोदी के नेतृत्व पर मुहर लगाई है, क्या इससे ये तय नहीं हो गया? क्या गुजरात में मोदी को सिर्फ हिंदू ही वोट देते हैं? उनके राज्य में अगर कोई विकास हुआ है, तो क्या उसका लाभ सभी वर्गों के लोगों को नहीं मिला है? मोदी कई बार कह चुके हैं कि वे देश के नागरिकों को उनके धर्म या जाति के आधार पर बाँटकर नहीं देखते और न ही गुजरात में उनकी सरकार इस तरह काम करती है। तो फिर हिन्दू-कार्डक्या है और ये कैसे साबित हुआ कि मोदी सेक्यूलरिज्म के विरोधी हैं?

वे यह भी लिखते हैं कि नरेंद्र मोदी ने
जमात-उलमा-हिंदसे मुसलमानों का विश्वास जीतनेके लिए कुछ सुझाव मांगे थे और जमात ने ये कहकर सही किया कि मोदी को इस बारे में खुद सोचना चाहिए। उनके शब्द हैं: मोदी को खुद सोचना चाहिए कि मुसलमानों का विश्‍वास कैसे जीतें। मोदी एक काम सीधे-सीधे कर सकते हैं कि वह 2002 में राज्य में हुए उन दंगों के लिए माफी मांगे जो गोधरा, जो अहमदाबाद से ज्यादा दूर नहीं है, में ट्रेन के एक डब्बे में कुछ हिंदू तीर्थयात्रियों के जल जाने के बाद हुए थे। कहा जाता है कि दंगों को उनका आशीर्वाद था।

मैं नैय्यर जी के इस वाक्य को तीन भागों में बाँटकर देखता हूँ।
 नरेंद्र मोदी से ये प्रश्न कई वर्षों से कई लोग कई तरह से पूछते रहे हैं कि गुजरात दंगों के लिए माफ़ी मांगने में क्या आपत्ति है। लेकिन इसके बदले मोदी जो प्रतिप्रश्न करते हैं, उसका उत्तर आज तक किसी ने नहीं दिया है। मोदी ने स्पष्ट कहा है कि अगर मैं अपराधी हूँ, तो आपको मेरे लिए फांसी की मांग करनी चाहिए, अपराधी की माफ़ी की मांग करके आप गलत उदाहरण क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं? अगर मैं दोषी हूँ, तो मुझे फांसी दी जानी चाहिए और अगर दोषी नहीं हूँ, तो माफ़ी किस बात की मांगूं?” मोदी के इस प्रश्न का उत्तर अभी तक किसी ने नहीं दिया है।

नैय्यर जी ने ये लिखा है कि दंगे ट्रेन के एक डब्बे में कुछ हिन्दू तीर्थयात्रियों के
जल जानेके बाद हुए थे। इसका मतलब क्या ये लगाया जाए कि नैय्यर जी कहना चाहते हैं कि गोधरा में मारे गए लोग अपने आप आग लग जाने से मरे थे? तो फिर प्रश्न ये है कि गोधरा-कांड पर जिन जांच आयोगों ने अपनी रिपोर्टें दीं और इस कांड के लिए न्यायालयों ने जिन्हें दोषी माना, क्या उन रिपोर्टों और देश की न्याय-व्यवस्था पर भी विश्वास न करें?

नैय्यर जी अपने वाक्य के तीसरे भाग में लिखते हैं
, कहा जाता है कि दंगों को उनका (मोदी का) आशीर्वाद था।
कुछ दिनों पूर्व एक टीवी चैनल पर प्रसारित एक इंटरव्यू में श्री अरुण जेटली ने बताया था कि अब तक 6 विभिन्न आयोग/कमिटियां गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच कर चुकी हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी भी शामिल है। इनमें से किसी को भी गुजरात दंगों में मोदी के विरुद्ध कोई प्रमाण/साक्ष्य नहीं मिला है। मेरे मन में प्रश्न ये है कि क्या मोदी विरोधी विचारक इन जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को सिर्फ इसलिए नहीं मानेंगे क्योंकि कुछ लोगों द्वारा आज भी ये कहा जाता है कि दंगों को मोदी का आशीर्वाद था?
और एक प्रश्न ये भी है कि जमात के उत्तर के बारे में लिखते समय उन्होंने केवल ही पक्ष का उल्लेख किया है, लेकिन कुछ समय पहले जमात के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी द्वारा मोदी के समर्थन में कही गई किसी बात का कोई उल्लेख नहीं किया है। मौलाना मदनी ने ये भी कहा था कि गुजरात में मुसलमानों अन्य तथाकथित सेक्युलर सरकारों वाले राज्यों की तुलना में आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में हैं।
आगे नैय्यर जी ने ये भी लिखा है: उन्होंने कुछ दिन पहले गुजरात के दंगा-पीड़ितों की तुलना किसी तेज गति से चलती कार के नीचे कुचल जाने वाले पिल्ले से की।

जिस दिन यह इंटरव्यू प्रकाशित हुआ और मीडिया चैनलों ने यही उपरोक्त वाक्य दोहरा-दोहरा कर मोदी के खिलाफ़ दुष्प्रचार शुरू किया था
, मोदी का यह इंटरव्यू लेने वाली पत्रकार महोदया ने उसी दिन ट्विटर पर खुद कहा था कि श्री मोदी की बात को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। मुझे आश्चर्य है कि फिर भी आज नैय्यर जी वही दोहरा रहे हैं।
आगे श्री नैय्यर महोदय ने मुज़फ्फरनगर दंगों को भी भाजपा की साजिश बताया है। आश्चर्य ये है कि उन्होंने इसके लिए मीडिया रिपोर्टोंको आधार बताया है, लेकिन एक टीवी चैनल द्वारा प्रसारित स्टिंग ऑपरेशनके बारे में कुछ नहीं लिखा है। वे यह भी लिखते हैं कि "प्रशासन हर बार फेल हो जाता है क्योंकि इसका राजनीतिकरण हो गया है पुलिस भी दूषित हो गई है और वह हिंदुओं की ओर झुक जाती है।" मेरे मन में प्रश्न ये है कि अगर गुजरात दंगों के लिए कोई साक्ष्य न मिलने के बावजूद भी मोदी दोषी हैं, तो फिर मुज़फ्फरनगर या अन्य स्थानों पर जो दंगे हुए उनके लिए भी क्या वहाँ के मुख्यमंत्री दोषी ठहराए जाएंगे? मोदी या भाजपा के शासन में दंगा हुआ, तो भी भाजपा दोषी और जहाँ अन्य किसी का शासन है, वहाँ भी दंगा हुआ, तो भी भाजपा दोषी ये कैसा तर्क हैअपने लेख में उन्होंने आडवाणी जी के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए भी बहुत कुछ लिखा है और संघ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है, जिसके बारे में अब कुछ कहना आवश्यक नहीं लगता। 

मित्रों, प्रश्न तो मेरे मन में और भी बहुत हैं
, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है कि क्या ऐसे लेखों को मैं निष्पक्ष मानूं और इन पर विश्वास करूं? आपकी क्या राय है?

5 comments:

  1. कुलदीप नैयर जैसे लोगों के मन में बंटवारे के बाद वर्ग विशेष को लेकर इतनी दहशत बैठ गयी है कि वे सोते जागते 1947 के सपने देखते रहते है...तब से लेकर अब तक काफी पानी बह गया है माँ गंगा के तटों से...अब वे भारत में रहते हैं और उनको किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक से इस डर का इलाज कराना चाहिये अन्यथा गोलोक में उनकी आत्मा के साथ ये डर चला गया तो पुर्नजन्म में भी पीछा न छोड़ेगा...ऐसे तथाकथित गंभीर लोगों के कहे और लिखे को तटस्थ मानना तटस्थता का अपमान करना है। ये लोग शरीर से भारत में आ गये हैं और दिल से पाकिस्तान में रहते हैं।

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    1. आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद!

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  2. ye vahi lokamt group hai jiske malik darda bandhu congress ke rajsabha sansad aur maharstra me mantree hai.is news pepar's se aap kya nishpaksata ki ummid kare.ye to kuladeep nair ya aise hi kisi mahesh bhatt jaise logo ki mansikata chapenge.

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    1. आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद! हाँ, आपने सही लिखा है. ये वही लोकमत समूह है.

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  3. sahi kaha lokmat me hamesha modi ke virodh me hi likha jata hai kyunki wo congress walo ka news paper hai sirf lokmat hi nahi bahut sare news paper jisme congress ka hat hai isiliye hamesha news wale modi ke bare me hamesha galat hi likhate hai par inko ye nahi pata ki jyada buraya karne ke vajah se hi naredra modi etne popular hua hai kyonki unki galat chavi ke sath unka acha kam bhi logo ke samne aaya hai

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