Thursday, October 3, 2013

"पहले शौचालय, फिर देवालय"

आज दिन-भर मीडिया और सोशल मीडिया पर श्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर खूब चर्चा होती रही। हर समाचार-पत्र में इस आशय की ख़बरें छपी और मीडिया चैनलों पर यह बार-बार दोहराया जाता रहा कि मोदी ने शौचालय को "मंदिर" से बेहतर बताया है। मोदी समर्थक और मोदी विरोधी, हिन्दुवादी और सेक्युलरवादी आदि आदि सभी प्रकार के लोगों ने इस पर अपने-अपने विचार भी रखे।
कुछ लोगों ने इसकी तुलना जयराम रमेश द्वारा पिछले वर्ष दिए गए एक बयान से की। कुछ ने पूछा कि ऐसे बयान पर जयराम रमेश से माफ़ी की मांग करने वाली भाजपा आज चुप क्यों है। कुछ ने निष्कर्ष निकाला कि मोदी अब वोटों का जुगाड़ भिड़ाने और किसी भी तरह सत्ता तक पहुंचने के लिए आतुर हैं और इसलिए वे अब हिन्दुवादी की छवि से निकलकर सेक्युलर बनना चाहते हैं।
स्वाभाविक रूप से मैंने भी अपनी बुद्धि के अनुसार जानने-समझने का प्रयास किया कि मोदी और जयराम रमेश ने क्या कहा था। मैं इस पोस्ट के द्वारा किसी के भी बयान या विचार का समर्थन या विरोध नहीं कर रहा हूँ । मैं बस वह जानकारी यहाँ दे रहा हूँ, बाकी निष्कर्ष आप निकालें और अपनी राय भी दें।

१. मोदी ने क्या कहा:
नरेंद्र मोदी कल दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह एक एनजीओ द्वारा आयोजित कार्यक्रम था, जिसमें युवाओं ने देश की समस्याओं और चुनौतियों के बारे में मोदी से कुछ प्रश्न पूछे थे और कुछ युवाओं ने अपनी ओर से सुझाव भी दिए थे। इन्हीं में से एक प्रश्न सफ़ाई-व्यवस्था (Sanitation) के बारे में था। इस पर अपने विचार व्यक्त करते समय मोदी ने ये कहा:
"मित्रों, समस्याओं के समाधान खोजना, इसके लिए हमारे यहाँ प्रयास नहीं होता है। और उसी का नतीजा है कि हम संकटों में उलझे रहते हैं। यहाँ पर सैनिटेशन को लेकर बहुत चिंता जताई गई, बहुत स्वाभाविक है ये; इक्कीसवीं सदी में हम जी रहे हैं और आज भी हमारी माताओं-बहनों को खुले में शौच क्रिया के लिए जाना पड़े, क्या इससे बड़ी कोई शर्मिंदगी की बात हो सकती है? किसी को भी पीड़ा होती है मित्रों। लेकिन, जिस देश में गांधीजी जीवन भर स्वच्छता, सफ़ाई इसके लिए जीते रहे, जीवन भर ये उनकी प्राथमिकता थी, उस देश में हम इस स्थिति में हैं।
मित्रों, मेरी पहचान तो है हिन्दुत्ववादी की, लेकिन मेरी रियल सोच क्या है मैं आपको बताता हूँ। मैंने मेरे राज्य में बड़ी हिम्मत के साथ एक बात कही है, और लगातार कहता हूँ। जो मेरी छवि है वो ये हिम्मत नहीं कर सकता है। लेकिन मैं करता हूँ। मैं कहता हूँ, पहले शौचालय, फिर देवालय। हर गाँव में लाखों रूपये के  देवालय तो हैं, लेकिन शौचालय नहीं हैं।"
मोदी  का यह बयान आप इस वीडियो में सुन सकते हैं:

यहाँ ध्यान देना आवश्यक है कि मोदी ने कहीं भी "मंदिर" शब्द का उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने केवल देवालय कहा है और मेरी समझ के अनुसार देवालय किसी भी धर्म या संप्रदाय का पूजा/उपासना-स्थल हो सकता है।लेकिन मीडिया ने इसकी रिपोर्टिंग करते समय "मंदिर/Temple" कहकर ही उल्लेख किया है, जो मुझे ठीक नहीं लगता है।

कुछ लोगों ने इसकी तुलना जयराम रमेश के बयान से की है। आइये देखें कि जयराम रमेश ने क्या कहा था।
२. जयराम रमेश ने क्या कहा था:
अक्तूबर  २०१२ में, "निर्मल भारत यात्रा" के बारे में बोलते हुए जयराम रमेश ने ये कहा था:
"अब तक यात्राएं विनाश के लिए हुई हैं। ये यात्रा असली विकास के लिए है। ये यात्रा एक सकारात्मक और रचनात्मक काम के लिए है। ये यात्रा वो चीज़ बनाने के लिए है, जो मैं समझता हूँ, मंदिर से भी पवित्र है. और वो है...शौचालय।"
जयराम रमेश का बयान आप इस वीडियो में सुन सकते हैं:



यहाँ हम स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं कि श्री रमेश ने "मंदिर" शब्द का उल्लेख किया था और शौचालय से इसकी तुलना करते हुए शौचालय को मंदिर से भी पवित्र कहा था। लेकिन नरेंद्र मोदी ने न तो मंदिर शब्द का उल्लेख किया है और न ही ऐसी कोई तुलना की है।
तो क्या मोदी और जयराम रमेश के बयान को एक समान मानना सही होगा? निष्कर्ष आप स्वयं निकालें और इस पोस्ट पर कमेन्ट के रूप में अपनी राय मुझे भी बताएँ।