Thursday, February 13, 2014

नरेंद्रायण: अनुवादक का प्राक्कथन

('नरेंद्रायण: व्यक्ति से समष्टि - एक आकलन', डॉ. गिरीश दाबके द्वारा लिखित मराठी पुस्तक है, जिसका हिंदी में अनुवाद करने का अवसर मुझे मिला इस पुस्तक में वडनगर के एक सामान्य बालक से लेकर गुजरात के यशस्वी मुख्यमंत्री और अब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी की जीवन-यात्रा और उनके व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाली घटनाओं, ऐतिहासिक सन्दर्भों, महापुरुषों और संगठनों की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक का विमोचन दिनांक १ फरवरी २०१४ को मुंबई के प्रबोधनकार ठाकरे सभागृह में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मुख्तार अब्बास नकवी के हाथों हुआ। हिन्दी के साथ ही, पुस्तक के मूल मराठी संस्करण एवं इसके गुजराती और अंग्रेज़ी में अनूदित संस्करणों का विमोचन भी हुआ। हिन्दी संस्करण के अनुवादक के रूप में मेरे द्वारा लिखी गई प्रस्तावना व प्रकाशन कार्यक्रम के कुछ चित्र प्रस्तुत हैं।)
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अनुवादक का प्राक्कथन
नरेन्द्र मोदी!

विमोचन-कार्यक्रम
यह नाम आज देश की राजनीति के केन्द्र में है। पिछले १२ वर्षों में उनके नेतृत्व में गुजरात ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जो देश के किसी भी राज्य के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है। जीवन का कोई क्षेत्र और समाज का कोई वर्ग ऐसा नहीं है, जिसकी उन्नति के लिए मोदी सरकार ने कार्य न किया हो। विभिन्न योजनाओं के लिए गुजरात सरकार को इन बारह वर्षों में मिले पुरस्कारों की सूची इतनी लंबी है कि हम गिनते-गिनते थक जाएं। मोदी जी की उपलब्धि केवल इतनी नहीं है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने राज्य का अभूतपूर्व विकास किया है, बल्कि मुझे लगता है कि उनकी इससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने जाति-धर्म, तुष्टिकरण, भेदभाव, स्वार्थ और कोरे चुनावी वादों पर आधारित राजनीति को विकास की दिशा में मोड़ दिया है। यह उनकी एक अदभुत सफलता है। एक भाषण में मोदी जी ने बिल्कुल ठीक कहा था कि “अब गुजरात विकास का पैमाना बन चुका है। जो लोग हमारे समर्थक हैं, वे कहते हैं कि हमने भी गुजरात की तरह विकास किया है और जो विरोधी हैं, वे कहते हैं कि गुजरात से अधिक विकास तो हमने किया है। मतलब साफ़ है। आप चाहे समर्थक हों या विरोधक हों, किन्तु अब विकास का पैमाना गुजरात ही है।”

सन २००२ में मैंने १८ वर्ष की आयु पूर्ण की और मुझे मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। उसी वर्ष गोधरा की
हिन्दी संस्करण का मुख्य पृष्ठ
दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी और संभवतः उसी वर्ष मैंने पहली बार श्री नरेन्द्र मोदी का नाम सुना। उन दिनों ऐसा लगता था, मानो अधिकांश मीडिया चैनलों और समाचार-पत्रों में नरेन्द्रभाई को हत्यारा साबित करने की होड़ लगी है। ऐसा लगता था कि मोदी को दोषी ठहराना ही अब एकमात्र एजेंडा रह गया है और यही देश की सभी समस्याओं का हल है। अधिकांश चैनलों व समाचार-पत्रों की विश्वसनीयता पर मुझे संदेह होने लगा था। यहीं से मेरे मन में श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन, कार्य और व्यक्तित्व के बारे में अधिकाधिक जानने की उत्सुकता जागी। तभी से मैंने जितना संभव हो, इस बारे में जानकारी जुटाना व अध्ययन करना प्रारंभ किया। कुछ वर्ष बीत गए। इन वर्षों में गुजरात में रहने वाले मित्रों, परिचितों, संबंधियों आदि से भी विभिन्न अवसरों पर अनौपचारिक चर्चा हुई और धीरे-धीरे यह विश्वास अधिक दृढ़ होता गया कि मीडिया द्वारा बनाई जा रही छवि और मोदी जी की वास्तविक शैली एवं व्यक्तित्व में ज़मीन-आसमान का अंतर है। एक ओर गुजरात दंगों की जाँच के लिए गठित विभिन्न आयोगों द्वारा अपने निष्कर्षों में श्री मोदी को निर्दोष बताए जाने के समाचार सुनाई दे रहे थे और दूसरी ओर गुजरात में लगातार हो रहे विकास के चित्र दिखाई दे रहे थे। अब मन में श्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कोई भ्रम या संशय नहीं रह गया था और इसका स्थान अब उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व एवं कृतित्व के प्रति आशा और विश्वास ने ले लिया था। देश के लाखों-करोड़ों युवाओं की तरह मेरी भी यही इच्छा थी कि भाजपा आगामी चुनाव में मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे और वे विजयी होकर देश का नेतृत्व करें, ताकि गुजरात के समान ही पूरा देश अब सुरक्षा, विकास, सुशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की नई राह पर आगे बढ़े। हम सभी की आशा के अनुरूप जल्दी ही भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मोदी जी के नाम की घोषणा भी हो गई। उसी समय मेरे मन में भी यह विचार आया कि राष्ट्र-सेवा के लिए भाजपा और मोदी जी के इस प्रयास में मुझे भी अपनी क्षमता के अनुसार अवश्य योगदान करना चाहिए। यह अवसर मुझे ‘नरेंद्रायण’ के अनुवाद के माध्यम से मिला।

पुस्तक के लेखक डॉक्टर गिरीश दाबके और मैं
वैसे तो मोदी जी के जीवन और कार्यों के बारे में कई पुस्तकें लिखी गईं हैं। उनमें से कुछ मैंने पढ़ी भी हैं, किन्तु मेरे मन के कई प्रश्न फिर भी अनुत्तरित रह गए थे। उनमें से सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि इतने वर्षों तक लगातार केवल एक ही व्यक्ति को आलोचना और विरोध का लक्ष्य क्यों बनाया जा रहा है और दसों दिशाओं से अनवरत जारी इन आक्रमणों के बावजूद वह व्यक्ति इतना स्थिर, दृढ़ और सशक्त कैसे रह सका है? यह सचमुच असामान्य बात लगती है। मेरी इस जिज्ञासा का समाधान ‘नरेंद्रायण’ को पढ़कर हुआ। इसी पुस्तक में मुझे यह उत्तर मिला कि ‘नरेन्द्र मोदी का विरोध’ किसी एक व्यक्ति का विरोध मात्र नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विरोध के बहाने यह एक संगठन और उससे भी आगे बढ़कर एक विचारधारा का विरोध है। यह भी पता चला कि विरोध का यह सिलसिला आज नहीं शुरू हुआ है, बल्कि यह स्वातंत्र्यवीर सावरकर और डॉक्टर हेडगेवार जैसे महापुरुषों के समय से ही जारी है। 

‘नरेंद्रायण’ को पढ़ते-पढ़ते ही यह भी स्पष्ट होता गया कि नरेन्द्र मोदी केवल एक सामाजिक-कार्यकर्ता या राजनेता नहीं हैं, बल्कि वे तो उच्च-कोटि के आध्यात्मिक साधक भी हैं। मेरा विश्वास है कि यह आध्यात्मिक साधना ही उन्हें किसी भी संघर्ष के क्षण में विचलित न होने की क्षमता प्रदान करती है। इस पुस्तक को पढ़कर ही मुझे यह भी पता चला कि श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व में एक सामाजिक-कार्यकर्ता, राजनेता, कवि, लेखक, वक्ता, द्रष्टा और आध्यात्मिक साधक का अद्भुत समन्वय है।

मेरी इच्छा थी कि मोदी जी के बारे में यह सारी जानकारी अधिकाधिक लोगों तक पहुँचनी चाहिए। इसी विचार से मैंने इस पुस्तक के लेखक डॉ. गिरीश दाबके जी से संपर्क किया एवं इस मराठी जीवनी का हिंदी अनुवाद करने की इच्छा जताई। मैं उनका आभारी हूँ कि उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार करके मुझे यह अवसर प्रदान किया। साथ ही, मैं प्रकाशक श्री मराठे जी एवं इस कार्य से जुड़े सभी व्यक्तियों का भी आभारी हूँ, जिनके सहयोग से यह स्वप्न साकार हुआ है।

इस पुस्तक में लेखक महोदय ने श्री नरेन्द्र मोदी के बचपन, पारिवारिक पृष्ठभूमि, सामजिक योगदान, संघ के प्रचारक के रूप में कार्य और आगे चलकर भाजपा के माध्यम से संगठन में एवं मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात में किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी तो दी ही है; साथ ही उन विभिन्न सामाजिक व राजनैतिक परिस्थितियों, ऐतिहासिक घटनाओं एवं महापुरुषों की भी चर्चा की है, जिनके प्रभाव एवं प्रेरणा से मोदी जी के व्यक्तित्व का विकास होता गया और एक दिन वडनगर का एक सामान्य बालक देश के करोड़ों नागरिकों की आशा का केंद्र बन गया। अनुवाद करते समय मैंने इस बात का पूरा प्रयास किया है कि मराठी संस्करण में व्यक्त मूल भावना हिन्दी में भी यथावत बनी रहे। साथ ही, अनुवाद के दौरान शब्दों का चयन करते समय भी मैंने कठिन शब्दों से बचने और यथासंभव सरल व सामान्य बोल-चाल में आने वाले शब्दों का उपयोग करने का ही प्रयास किया है। आशा है कि इससे यह पुस्तक अधिक रोचक व उपयोगी बन सकेगी।

इस ग्रन्थ के माध्यम से श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन और कार्यों के बारे में सही जानकारी सभी तक पहुँच सके, यही मेरे प्रयास की सफलता होगी। आप सभी की प्रतिक्रियाओं एवं सुझावों का सदैव स्वागत है!
सादर,
-सुमंत विद्वांस

8 comments:

  1. Gr8 wrk...!!!My best wishes...!!! Vandematram, Jai-Hind, Jai-Bharat...!!!

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    1. Shri Dharmendra ji, Thanks for your wishes.

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    2. सुमंतजी किरीट गोरे का नमस्कार,
      आपने नरेन्द्रायण के बारे बहुत अच्छा लिखा है। मैनं भी यह फोटो देखे नहीं थे। आपने कुछ फोटोंकी झलकियां दिखा दी, बहोत अच्छा लगा। आपका और मेरा दोनोंका इस पुस्तक में थोड़ा थोड़ा योगदान है। मैंने तो गुजराती नरेन्द्रायण का भी संपूर्ण डीटीपी किया है। आपको आपके आगे की पथ पर जाने के लिए बहुत सारी शुभकामनाएं।
      -किरीट गोरे ओर परिवार

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    3. श्री किरीट जी, नमस्कार! आपके योगदान के बिना तो पुस्तक इतनी उत्कृष्ट बन ही नहीं सकती थी. मैंने तो अनुवादक के रूप में केवल शब्द लिखे, किन्तु उन्हें सजाया तो आपने ही. विमोचन कार्यक्रम में तो आपसे भेंट नहीं हो सकी, किन्तु मुझे आशा है कि फिर कभी किसी न किसी अवसर पर अवश्य ही हम मिलेंगे.
      सादर,
      -सुमंत.

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  2. “अनुवादक का प्राक्कथन” पढ़कर ही आनंद आ गया- किताब मिल जाए तो परम आनंद आ जाएगा।
    बहुत-बहुत शुभेच्‍छाएं!
    - पीयूष

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    1. हार्दिक धन्यवाद पीयूष जी. कृपया अपनी संपर्क जानकारी मुझे sumant@sumant.in पर ईमेल द्वारा भेज दें, ताकि पुस्तक प्राप्ति के बारे में आपको विवरण भेज सकूं. सादर!

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  3. भाई सुमन्त जी, प्राक्कथन ऐसा है जैसे गागर में सागर.... इस महती कार्य के लिए साधुवाद स्वीकारें।

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    1. दिवाकर जी, हार्दिक आभार.

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