Friday, July 4, 2014

हृदय-ज्योति परिवार


स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘जीवित वही हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं। सिर्फ खुद के लिए जीने वाले लोग तो मृत ही हैं’।
छोटी-छोटी बातों को लेकर शिकायत करते रहने वाले और दूसरों की मदद से बचने के बहाने बनाने वाले कई लोग मैंने देखे हैं। किसी न किसी स्वार्थ के कारण ही दूसरों के लिए कुछ करने वाले और थोड़ी-सी मदद के बदले बहुत-कुछ पाने की चाह रखनेवाले भी मैंने देखे हैं। लेकिन जब अपनी खुद की ज़िंदगी ही खतरे में हो, तब भी अपने दुखों और कष्टों की परवाह किए बिना, निस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए कुछ करने वाले लोगों को देखना सचमुच अविश्वसनीय किन्तु उतना ही सुखद और प्रेरणादायी लगता है।
कुछ दिनों पहले मैं ऐसी ही एक महिला से मिला, जो जन्म से ही दिल की एक बेहद जटिल और असामान्य बीमारी से ग्रस्त हैं, जिनके लिए हर एक पल मौत से संघर्ष का पल है, कब धड़कन रुक जाए, इसका कोई ठिकाना नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी वे अपना दुःख भूलकर इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों की सहायता में जुटी रहती हैं। उस जुझारू प्रेरणादायी व्यक्तित्व का नाम है - सुश्री ज्योति मुंगसे।
पुणे के औंध में रहने वाली ज्योति जी के हृदय में जन्म से ही छिद्र है और इस असाध्य जटिलता के कारण डॉक्टरों ने बचपन में ही कह दिया था कि वे बहुत ज्यादा समय तक नहीं जी सकेंगी। लेकिन यह सुनकर निराश होने के बजाय ज्योतिजी ने मौत से लड़ने की ठान ली और पिछले चालीस वर्षों से वे हर पल मौत को हराकर आगे बढ़ती जा रही हैं। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उसी उम्र से ऑक्सीजन सिलिंडर उनका साथी है।
कुछ मित्रों के साथ मैं ज्योति जी से मिला (Jyotiji in red)
बचपन में डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को सलाह दी थी कि वे ज्योति को स्कूल न भेजें क्योंकि वह ज़रा भी  तनाव और भागदौड़ नहीं सह सकेगी। लेकिन माता-पिता ने हिम्मत की और उन्हें स्कूल में दाखिल करवाया। इसी से ज्योति को भी जीवन में संघर्ष करने और हार न मानने की प्रेरणा मिली। शरीर साथ नहीं दे रहा था, लेकिन यह उनकी दृढ़ और अदम्य इच्छा-शक्ति ही है कि इतनी कठिन परिस्थिति के बावजूद भी उन्होंने न सिर्फ अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की, बल्कि सामाजिक विज्ञान विषय में एमए की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। इसी दौरान सन 1997 में उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए। इस कारण कई अन्य समस्याएं और जटिलताएं भी उत्पन्न हुईं। लेकिन सभी तरह के संकटों पर मात करके ज्योति का संघर्ष जारी रहा। डॉक्टरों की सलाह थी कि उन्हें यात्रा बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने वैष्णोदेवी की कठिन चढ़ाई सहित कई स्थानों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। यहाँ तक कि उन्होंने पैरासेलिंग जैसा जोखिम भरा अनुभव भी लिया।
अपनी इस जटिल बीमारी से हार मान लेने और निराश होने के बजाय ज्योतिजी ने अपनी ही तरह हृदय की इस जटिल बीमारी से जूझ रहे लोगों की सहायता में अपना जीवन लगा देने का निश्चय किया। इसी उद्देश्य से उन्होंने सन 2004 में ‘हृदयज्योत परिवार’ नामक एक सामाजिक संस्था की स्थापना की। इस संगठन के माध्यम से अब तक उन्होंने 50 से ज्यादा बच्चों के उपचार और सर्जरी के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। साथ ही, उन्होंने हृदय-दोष की जानकारी देने वाली एक शॉर्ट-फिल्म भी बनाई है। (नीचे वीडियो देखें)

इस संस्था के माध्यम से जन्मतः हृदय दोष (Congenital Heart Disease) से पीड़ित लोगों को हार्ट-सर्जरी के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने में सहयोग दिया जाता है। साथ ही ट्रस्ट द्वारा गाँव-गाँव जाकर हृदय-रोगों के बारे में जन-जागरण करने, रोगियों व उनके माता-पिता को परामर्श व सहयोग प्रदान करने जैसे कार्य भी किए जाते हैं।
आज समाज में जन्म से ही विभिन्न तरह के हृदय रोगों से जूझ रहे रोगियों की संख्या हज़ारों में है। इनमें से कई रोगी ऐसे हैं, जिनकी समस्या को ऑपरेशन के द्वारा दूर किया जा सकता है। लेकिन आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए इस तरह के जटिल ऑपरेशन का खर्च उठा पाना संभव नहीं हो पाता। यदि समाज के हम सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करें, तो न जाने हमारे सामूहिक सहयोग से कितने लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
मैंने स्वयं ज्योतिजी से मिला हूँ और मैंने उनके कार्य की जानकारी ली है। इसलिए मुझे विश्वास है कि यदि हम उनके इस कार्य में सहयोग करें, तो निश्चित ही इसका सदुपयोग ही होगा। हम सभी को व्यक्तिगत स्तर पर अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना चाहिए और साथ ही कॉर्पोरेट स्तर पर CSR के माध्यम से भी यथासंभव सहायता दिलाने हेतु प्रयास भी करना चाहिए। मेरा अनुरोध है कि हम इस कार्य में योगदान करें।
अधिक जानकारी के लिए आप इस पते पर संपर्क कर सकते हैं:

हृदय-ज्योत परिवार
ई-21, श्रीराम नगर, डी.पी. रोड, औंध,
पुणे- 411007 
फोन: (020) - 25889467
(सुश्री ज्योति मुंगसे: 9850973132)

1 comment:

  1. Sumant I am really happy that you have taken initiative in the Great Cause of Jyoti.... God Bless You my brother

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